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मुख्यमंत्री रोजगार निर्मिती योजना: लाखों की मदद या सिर्फ कागज़ी सपना? CMEGP 2026 Guide

1) मुख्यमंत्री रोजगार निर्मिती कार्यक्रम योजना (The Scheme)

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (परियोजना लागत अधिकतम 50 लाख रुपये) की स्थापना के माध्यम से रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए मुख्यमंत्री रोजगार निर्मिती कार्यक्रम (Chief Minister Employment Generation Programme – CMEGP) नामक एक नई क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना को स्वीकृति प्रदान की है।

2) योजना का क्रियान्वयन (The Scheme Implementation)

यह योजना महाराष्ट्र सरकार के उद्योग विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में उद्योग निदेशालय (Directorate of Industries – DOI) द्वारा लागू एवं निगरानी की जाएगी।
योजना का क्रियान्वयन जिला उद्योग केंद्र (DICs), महाराष्ट्र राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग मंडल (KVIB) तथा बैंकों के माध्यम से किया जाएगा।

योजना के अंतर्गत दी जाने वाली सब्सिडी को उद्योग निदेशालय द्वारा चिन्हित बैंकों के माध्यम से निर्धारित अवधि के बाद लाभार्थी/उद्यमी के बैंक खाते में जमा किया जाएगा।

3) दृष्टिकोण (Vision)

• राज्य के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में नए स्वरोजगार उद्यमों/परियोजनाओं/सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (परियोजना लागत अधिकतम 50 लाख रुपये) की स्थापना के माध्यम से रोजगार के अवसर सृजित करना।
• परंपरागत कारीगरों, ग्रामीण एवं शहरी बेरोजगार युवाओं, नवोन्मेषी एवं अग्रणी विचारों को एक मंच पर लाकर उन्हें उनके निवास स्थान पर ही स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना।
• ग्रामीण एवं शहरी बेरोजगार युवाओं, स्टार्ट-अप्स और परंपरागत कारीगरों को सतत एवं स्थायी रोजगार प्रदान कर ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन को रोकना।
• परंपरागत कारीगरों की आय क्षमता बढ़ाकर ग्रामीण एवं शहरी रोजगार वृद्धि दर में योगदान देना।

4) उद्देश्य (Objectives)

अगले पाँच वर्षों में 1,00,000 सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों की स्थापना कर राज्य के 8–10 लाख युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना।
वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए लक्ष्य राज्य में 10,000 उद्यमों की स्थापना करना है।

ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उद्योग निदेशालय (DOI) जिला-वार लक्ष्य DIC एवं KVIB को जिला की पिछड़ापन स्थिति, बेरोजगारी, संसाधनों की उपलब्धता, उभरती तकनीकें और जनसंख्या आदि के आधार पर आवंटित करेगा।

5) वित्तीय सहायता का स्वरूप एवं मात्रा (Quantum and Nature of Financial Assistance)

लाभार्थियों की श्रेणियाँ

सामान्य वर्ग
• लाभार्थी का अंशदान: 10%
• सब्सिडी दर: शहरी क्षेत्र 15%, ग्रामीण क्षेत्र 25%

विशेष वर्ग (SC/ST/महिला/पूर्व सैनिक/दिव्यांग)
• लाभार्थी का अंशदान: 5%
• सब्सिडी दर: शहरी क्षेत्र 25%, ग्रामीण क्षेत्र 35%

नोट

• विनिर्माण क्षेत्र में परियोजना की अधिकतम अनुमेय लागत 50 लाख रुपये है। यदि वास्तविक परियोजना लागत अधिक है और योजना के अंतर्गत आने हेतु लागत को कृत्रिम रूप से कम दर्शाया गया है, तो ऐसे प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
• सेवा, कृषि आधारित, प्राथमिक कृषि प्रसंस्करण, ई-वाहन आधारित माल परिवहन एवं सिंगल ब्रांड सेवा इकाइयों के लिए अधिकतम परियोजना लागत 10 लाख रुपये है।
• लाभार्थी का अंशदान 5% से 10% तक होगा और शेष राशि बैंक द्वारा ऋण के रूप में प्रदान की जाएगी।

6) योजना के अंतर्गत पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria)

• आयु: 18 से 45 वर्ष (विशेष वर्ग को 5 वर्ष की छूट)
• आवेदक महाराष्ट्र का निवासी होना चाहिए (जन्म राज्य से बाहर होने पर अधिवास प्रमाणपत्र अनिवार्य)
• कोई आय सीमा नहीं
• स्वामित्व, साझेदारी एवं पंजीकृत स्वयं सहायता समूह (SHG) पात्र
• 10–25 लाख की परियोजना के लिए न्यूनतम 7वीं उत्तीर्ण
• 25 लाख से अधिक परियोजना के लिए न्यूनतम 10वीं उत्तीर्ण
• परिवार से केवल एक व्यक्ति पात्र (स्वयं एवं पति/पत्नी)
• केवल नए प्रोजेक्ट पात्र
• पहले से किसी सरकारी सब्सिडी योजना का लाभ लेने वाले पात्र नहीं

7) अन्य पात्रता शर्तें (Other Eligibility Conditions)

• विशेष वर्ग हेतु संबंधित प्रमाणपत्र अनिवार्य
• भूमि लागत परियोजना लागत में शामिल नहीं होगी
• निर्मित शेड/कार्यशाला लागत अधिकतम 20% तक मान्य
• परियोजना लागत में पूंजीगत व्यय एवं एक चक्र कार्यशील पूंजी शामिल
• SC/ST के लिए 20%, महिलाओं के लिए 30% और दिव्यांगों के लिए 3% आरक्षण

8) योजना के अंतर्गत पात्र इकाइयाँ (Eligible Units)

नए विनिर्माण, सेवा, कृषि आधारित, प्राथमिक कृषि प्रसंस्करण, ई-वाहन आधारित माल परिवहन एवं सिंगल ब्रांड सेवा इकाइयाँ पात्र होंगी।
राज्य स्तरीय समिति समय-समय पर नकारात्मक सूची (Negative List) जारी करेगी।

9) क्रियान्वयन एजेंसियाँ (Implementing Agencies)

राज्य स्तर पर उद्योग निदेशालय (DOI) नोडल एजेंसी होगी।
शहरी क्षेत्रों में DIC तथा ग्रामीण क्षेत्रों में KVIB योजना लागू करेंगे।
25 लाख रुपये से अधिक की परियोजनाओं का क्रियान्वयन DIC द्वारा किया जाएगा।

10) संबद्ध एजेंसियाँ (Associated Agencies)

• बैंक एवं वित्तीय संस्थाएँ
• महिला एवं बाल विकास विभाग
• MAVIM
• ITI, पॉलिटेक्निक, MSME-DI, NSIC, MCED, MITCON
• औद्योगिक संघ एवं क्लस्टर
• RSETI, COIR बोर्ड आदि

11) वित्तीय संस्थाएँ (Financial Institutions)

• सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक
• क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक
• SLMC द्वारा अनुमोदित निजी बैंक

12) CMEGP पोर्टल

पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है।
आवेदन केवल पोर्टल https://maha-cmegp.gov.in के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे।

13) लाभार्थी चयन एवं परियोजना स्वीकृति प्रक्रिया

जिला स्तर पर DIC, KVIB एवं बैंकों के प्रतिनिधियों द्वारा लाभार्थियों की पहचान की जाएगी।
जिला स्तरीय समिति द्वारा आवेदन की जांच, परामर्श एवं बैंक को अनुशंसा की जाएगी।
पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं समयबद्ध होगी।

14) बैंक वित्त (Bank Finance)

• सामान्य वर्ग: 90% ऋण
• विशेष वर्ग: 95% ऋण
• पुनर्भुगतान अवधि: 3 से 7 वर्ष
• CGTMSE के अंतर्गत क्रेडिट गारंटी अनिवार्य

15) शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र (Urban & Rural Areas)

2011 जनगणना के अनुसार 20,000 या उससे कम जनसंख्या वाले क्षेत्र ग्रामीण तथा उससे अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्र शहरी माने जाएंगे।

16) ऑनलाइन आवेदन एवं निधि प्रवाह प्रक्रिया

• केवल ऑनलाइन आवेदन
• यूनिक आवेदन ID
• दस्तावेज़ अपलोड अनिवार्य
• SMS/ई-मेल अलर्ट की सुविधा

17) राज्य स्तरीय निगरानी (State Level Monitoring)

राज्य स्तरीय निगरानी समिति

त्रैमासिक समीक्षा एवं समन्वय

राज्य स्तरीय उच्चाधिकार समिति

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में योजना की समीक्षा एवं मार्गदर्शन

18) आवासीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम (REDP)

सेवा क्षेत्र के लिए 1 सप्ताह एवं विनिर्माण क्षेत्र के लिए 2 सप्ताह का प्रशिक्षण अनिवार्य।

19) CMEGP इकाइयों का भौतिक सत्यापन

100% भौतिक सत्यापन उद्योग निदेशालय द्वारा किया जाएगा।

20) बैंकर समीक्षा बैठकें

जिला, जोनल एवं राज्य स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकें।

21) जागरूकता शिविर

ग्रामीण, अर्ध-शहरी एवं शहरी क्षेत्रों में विशेष प्रचार अभियान।

22) कार्यशालाएँ

राज्य, जिला एवं राष्ट्रीय स्तर पर उद्यमियों हेतु कार्यशालाएँ।

23) क्रियान्वयन एजेंसियों हेतु प्रशिक्षण

DIC, KVIB एवं अन्य एजेंसियों के कर्मचारियों हेतु नियमित प्रशिक्षण।

24) TA/DA प्रावधान

निरीक्षण एवं निगरानी हेतु कर्मचारियों के लिए यात्रा एवं दैनिक भत्ता।

25) प्रचार एवं प्रसार गतिविधियाँ

प्रिंट, रेडियो, टीवी, डिजिटल माध्यमों से व्यापक प्रचार।

26) MIS एवं आवेदन ट्रैकिंग सिस्टम

ई-गवर्नेंस आधारित निगरानी एवं रिपोर्टिंग प्रणाली।

27) CMEGP के अंतर्गत प्रस्तावित लक्ष्य (2019-20 से 2023-24)

कुल 1,00,000 परियोजनाएँ
कुल सब्सिडी: 3500 करोड़ रुपये

28) बीमार इकाइयों का पुनर्वास

RBI के दिशा-निर्देशों के अनुसार।

29) पंजीकरण

MSME मंत्रालय के अंतर्गत उद्योग आधार पंजीकरण अनिवार्य

30) CMEGP की निगरानी एवं मूल्यांकन

राज्य, क्षेत्रीय एवं जिला स्तर पर नियमित समीक्षा।

31) योजना का मूल्यांकन

दो वर्षों के बाद स्वतंत्र मूल्यांकन।

32) नकारात्मक गतिविधियों की सूची

मांस प्रसंस्करण, शराब, तंबाकू, प्लास्टिक उत्पादन, पशुपालन आदि प्रतिबंधित।

33) परामर्श टिप्पणी (Advice Note)

राज्य सरकार को योजना के नियम, पात्रता एवं सहायता राशि में संशोधन का पूर्ण अधिकार सुरक्षित है।

 

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