Union Budget 2026: क्या इस साल आप कम टैक्स देंगे? 1 फरवरी को मध्यम वर्ग को राहत की उम्मीद
हर साल Union Budget का इंतज़ार खास तौर पर मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों को रहता है।
1 फरवरी को पेश होने वाला बजट सिर्फ सरकारी आंकड़ों का दस्तावेज़ नहीं होता,
बल्कि यह तय करता है कि आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ेगा या कुछ हल्का होगा।
Table of Contents (अनुक्रमणिका)
- Union Budget और मध्यम वर्ग की उम्मीदें
- Union Budget 2026 क्यों है खास
- मध्यम वर्ग के लिए टैक्स क्यों अहम
- नया इनकम टैक्स सिस्टम क्यों लाया गया
- नए टैक्स सिस्टम की शुरुआत
- नए टैक्स सिस्टम में बदलाव
- Union Budget 2023 के बड़े फैसले
- Union Budget 2024 में मिली राहत
- 12 लाख तक टैक्स फ्री का फायदा
- Union Budget 2026 से क्या उम्मीदें
Union Budget और मध्यम वर्ग की उम्मीदें
हर Union Budget के समय मध्यम वर्ग की सबसे बड़ी उम्मीद यही होती है
कि टैक्स स्लैब में बदलाव हो और टैक्स का बोझ कुछ कम हो।
महंगाई के दौर में टैक्स राहत को सरकार का सबसे बड़ा जनहितैषी कदम माना जाता है।
Union Budget 2026 क्यों है खास
Union Budget 2026 इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि यह वित्त मंत्री
निर्मला सीतारमण का लगातार नौवां बजट होगा।
नया टैक्स सिस्टम अब पूरी तरह लागू हो चुका है और सरकार के पास इसे और बेहतर बनाने का मौका है।
मध्यम वर्ग के लिए टैक्स क्यों अहम
मध्यम वर्ग सीधे वेतन से टैक्स देता है।
उसे टैक्स बचाने के सीमित विकल्प मिलते हैं,
इसलिए Union Budget में टैक्स से जुड़ा हर फैसला उनकी मासिक सैलरी पर असर डालता है।
नया इनकम टैक्स सिस्टम क्यों लाया गया
जटिल नियमों से राहत
Union Budget 2020 में सरकार ने नया टैक्स सिस्टम पेश किया।
इसका उद्देश्य टैक्स नियमों को सरल बनाना और आम करदाता को पेशेवर मदद पर निर्भरता से बचाना था।
नए टैक्स सिस्टम की शुरुआत – Union Budget 2020
| आय सीमा (रुपये में) | टैक्स दर |
|---|---|
| 0 – 2.5 लाख | शून्य |
| 2.5 – 5 लाख | 5% |
| 5 – 7.5 लाख | 10% |
| 7.5 – 10 लाख | 15% |
| 10 – 12.5 लाख | 20% |
| 12.5 – 15 लाख | 25% |
| 15 लाख से ऊपर | 30% |
नए टैक्स सिस्टम में समय-समय पर बदलाव
Union Budget 2023 के बड़े फैसले
| फैसला | विवरण |
|---|---|
| टैक्स फ्री सीमा | 3 लाख रुपये |
| स्टैंडर्ड डिडक्शन | 50,000 रुपये |
| 7 लाख तक आय | पूरा टैक्स माफ |
| सरचार्ज | 37% से घटाकर 25% |
| डिफॉल्ट सिस्टम | नया टैक्स सिस्टम |
नई व्यवस्था (New Regime) के तहत आयकर स्लैब में बड़े बदलाव देखे गए, जिसमें 30% का टैक्स स्लैब अब ₹24 लाख से अधिक की आय पर लागू होगा, जबकि पहले यह सीमा ₹15 लाख थी।
पुरानी vs नई टैक्स व्यवस्था: पिछले कुछ वर्षों में आप कितनी टैक्स बचत कर पा रहे हैं?
एक गौर करने वाली बात यह है कि नई टैक्स व्यवस्था आने के बाद भी पुरानी व्यवस्था अभी तक बनी हुई है, जिसमें छूट (Exemptions) तो ज्यादा हैं पर टैक्स की दरें भी ऊंची हैं। सरकार की मंशा स्पष्ट है: नई व्यवस्था को ‘डिफ़ॉल्ट’ सेट करके और सभी नए फायदों को इसमें जोड़कर, टैक्सपेयर्स को पुरानी छोड़कर नई व्यवस्था अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
Old vs New Regime: Tax Savings Over Time (At ₹10 Lakh Income)
| Particulars | FY 2020-21 to 2025-26 (Old Regime) |
FY 2020-21 (New Regime) |
FY 2023-24 (New Regime) |
FY 2024-25 (New Regime) |
FY 2025-26 (New Regime) |
|---|---|---|---|---|---|
| Gross income | 1,000,000 | 1,000,000 | 1,000,000 | 1,000,000 | 1,000,000 |
| Standard deduction | 50,000 | – | 50,000 | 75,000 | 75,000 |
| Chapter VI-A deduction | 150,000 | – | – | – | – |
| Net taxable income | 800,000 | 1,000,000 | 950,000 | 925,000 | 925,000 |
| Tax liability without cess | 72,500 | 75,000 | 52,500 | 42,500 | 32,500 |
| Rebate u/s 87A | – | – | – | – | 32,500 |
| Net tax liability | 72,500 | 75,000 | 52,500 | 42,500 | – |
| Net tax liability with cess | 75,400 | 78,000 | 54,600 | 44,200 | – |
| Savings due to new regime | 2,600 | – | 20,800 | 31,200 | 75,400 |
| Savings due to reforms | – | 23,400 | 10,400 | 44,200 | – |
| Savings over 6 years | Total: 78,000 | ||||
ऊपर दिए गए चार्ट केवल सांकेतिक (indicative) हैं। आपका वास्तविक टैक्स आपकी आय के स्तर और आपके द्वारा ली जाने वाली कटौती (deductions) और छूट (exemptions) की राशि पर निर्भर करेगा। ₹12 लाख से अधिक की आय और एक निश्चित मात्रा में कटौती के साथ, विभिन्न वेतन स्तरों पर पुरानी व्यवस्था (Old Regime) अधिक उपयुक्त हो सकती है।
इसलिए, जबकि ऊपर दिए गए उदाहरण यह स्पष्ट करते हैं कि नई व्यवस्था के तहत पिछले कुछ वर्षों में टैक्स लाभ कैसे बढ़े हैं, बेहतर समझ के लिए अपनी कुल कटौती और छूट की गणना करना महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए, पुरानी और नई व्यवस्था के वर्तमान स्लैब के अनुसार, यदि आपकी कुल आय ₹24.75 लाख से अधिक है, तो पुरानी व्यवस्था आपके लिए तभी फायदेमंद है जब आपकी कुल कटौती और छूट ₹8 लाख से अधिक हो।
कटौती और छूट का यह स्तर 30% टैक्स स्लैब के लिए है; ₹24 लाख से कम की आय के लिए यह स्तर अलग होगा।
EY इंडिया के टैक्स पार्टनर, अमरपाल चड्ढा ने TOI को बताया, “पिछले कुछ वर्षों में, बढ़ती मूल छूट सीमा और घटती स्लैब दरों के कारण नई टैक्स व्यवस्था ने अधिकांश वेतनभोगी करदाताओं के घर ले जाने वाले वेतन (take-home pay) में स्पष्ट रूप से वृद्धि की है। वित्त वर्ष 2020-21 में ₹10 लाख की आय पर, नई व्यवस्था के तहत टैक्स देनदारी पुरानी व्यवस्था की तुलना में थोड़ी अधिक थी। हालांकि, अगले पांच वर्षों (FY 2021-22 से FY 2025-26) में, सुधारों ने इस तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है। इसके परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 2025-26 में नई व्यवस्था के तहत पुरानी व्यवस्था की तुलना में ₹75,400 की बचत हुई है।”
वे आगे कहते हैं, “₹20 लाख और ₹40 लाख की आय के लिए, वित्त वर्ष 2025-26 में पुरानी व्यवस्था की तुलना में बचत क्रमशः लगभग ₹1.74 लाख और ₹2.02 लाख है। अब, यदि हम छह साल की अवधि (FY 2020-21 से FY 2025-26) में नई टैक्स व्यवस्था के तहत बचत की तुलना करें, तो यह काफी बढ़ गई है — ₹10 लाख की आय पर लगभग ₹78,000, ₹20 लाख पर ₹1.58 लाख और ₹40 लाख पर ₹1.87 लाख की बचत हुई है। चूंकि अधिकांश करदाता नई/डिफ़ॉल्ट व्यवस्था को अपना रहे हैं, इसलिए बजट 2026 में स्लैब में और सुधार इस ट्रेंड को और तेज कर सकते हैं।”
हालांकि करदाताओं का एक निश्चित प्रतिशत अभी भी पुरानी व्यवस्था से लाभान्वित हो रहा है (उदाहरण के लिए वे जो भारी हाउस रेंट अलाउंस (HRA) या होम लोन क्लेम करते हैं), लेकिन निर्धारण वर्ष (AY) 2024-25 के लिए दाखिल किए गए 70% से अधिक रिटर्न नई व्यवस्था के तहत थे। टैक्स विशेषज्ञों को उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में और भी अधिक करदाता नई आयकर व्यवस्था को अपनाएंगे, खासकर ₹12 लाख तक शून्य टैक्स के स्तर ने कई लोगों को शिफ्ट होने के लिए प्रेरित किया है।
हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि सरकार बचत और आवास को बढ़ावा देने के लिए धारा 80C और होम लोन के ब्याज जैसे कुछ लोकप्रिय कटौती और छूट के लाभों को नई व्यवस्था में पेश करने पर विचार कर सकती है।
प्रमुख जानकारी (Key Highlights):
- ₹24.75 लाख से ज्यादा आय: पुरानी व्यवस्था तभी चुनें जब छूट ₹8 लाख से अधिक हो।
- बचत का गणित: ₹40 लाख की आय पर अब ₹2 लाख तक की बचत हो रही है।
- बजट 2026 की उम्मीद: विशेषज्ञों के अनुसार 80C और होम लोन के लाभ नई व्यवस्था में भी शामिल हो सकते हैं।
Union Budget 2024 में मिली बड़ी राहत
Union Budget 2024 में स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया,
जिससे नौकरीपेशा लोगों को सीधी राहत मिली।
12 लाख तक टैक्स फ्री – कितना बड़ा फैसला?
सरकार के ऐलान के अनुसार नए टैक्स सिस्टम में
12 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं देना होगा।
नौकरीपेशा लोगों के लिए यह सीमा 12.75 लाख रुपये तक जाती है।
Union Budget 2026 से क्या उम्मीदें
अब सबकी निगाहें Union Budget 2026 पर हैं।
उम्मीद की जा रही है कि सरकार मध्यम वर्ग को
और राहत देने के लिए टैक्स स्लैब में सुधार कर सकती है।
निष्कर्ष
Union Budget 2026 मध्यम वर्ग के लिए उम्मीद और चिंता दोनों लेकर आया है।
1 फरवरी को साफ हो जाएगा कि यह बजट राहत देगा या टैक्स का बोझ जस का तस रहेगा।
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